माँ बाप अपने खून पसीने की मेहनत करके पढ़ा लिखाकर बच्चों को बाहर भेजते हैं ओर वो बच्चे बाहर जाके माँ बाप को ही पराया समझने लग जाते हैं । उनको डर रहता है कि कहीं माँ ये ना कहदे बेटा हमें अपने साथ शहर ले चलो । कुछ एसी ही एक कहानी है।
माँ बाप अपने खून पसीने की मेहनत करके पढ़ा लिखाकर बच्चों को बाहर भेजते हैं ओर वो बच्चे बाहर जाके माँ बाप को ही पराया समझने लग जाते हैं । उनको डर रहता है कि कहीं माँ ये ना कहदे बेटा हमें अपने साथ शहर ले चलो । कुछ एसी ही एक कहानी है।
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