कहानी भोलू के मर्द होण की (हरियाणवी)
एक मर्द को मर्द होने के लिए बहुत बलिदान करने पड़ते हैं लोग ये नहीं समझते उनकी भी भावनाएं होती हैं, उनको भी रोना आ सकता है या दर्द होता है ऐसी ही एक कहानी एक बालक की जिसको बचपन में सिखाया जाता है की उसे क्या करना है ताकि वो एक सच्चा मर्द कहलाये और क्या नहीं करना है ताकि वो लड़की जैसा नहीं बन जाये। आइये, सुनते हैं एक ऐसी ही कहानी कीर्ति की जुबानी।
एक मर्द को मर्द होने के लिए बहुत बलिदान करने पड़ते हैं लोग ये नहीं समझते उनकी भी भावनाएं होती हैं, उनको भी रोना आ सकता है या दर्द होता है ऐसी ही एक कहानी एक बालक की जिसको बचपन में सिखाया जाता है की उसे क्या करना है ताकि वो एक सच्चा मर्द कहलाये और क्या नहीं करना है ताकि वो लड़की जैसा नहीं बन जाये। आइये, सुनते हैं एक ऐसी ही कहानी कीर्ति की जुबानी।











