जिसकी गेल्या खेल्या उसते लठ बजावे स (हरियाणवी)
आजकल रिश्ते नाते सरे बिगड़गे सं न किसे नै कोई शर्म रही ना प्यार रह्या सब अपने अपने तक रहना चाहते हैं और तो और भाइयों को ही देख लो जो बचपन में साथ खेले, सब चीजें बांटकर खाई आज वो भाई आपस में लड़ रहे हैं एक-दूसरे से बोलना तक पसंद नहीं करते तो आइये सुनते हैं हालात आजकल के रिश्तों के।
आजकल रिश्ते नाते सरे बिगड़गे सं न किसे नै कोई शर्म रही ना प्यार रह्या सब अपने अपने तक रहना चाहते हैं और तो और भाइयों को ही देख लो जो बचपन में साथ खेले, सब चीजें बांटकर खाई आज वो भाई आपस में लड़ रहे हैं एक-दूसरे से बोलना तक पसंद नहीं करते तो आइये सुनते हैं हालात आजकल के रिश्तों के।











