फिरबे एक संवेदनशील ग्रामीण कथा है, जो परंपरा, सामाजिक दबाव और शोक को दर्शाती है। एक बुज़ुर्ग महिला की मृत्यु के बाद ‘फिरबे’ रस्म के लिए निकला परिवार, यात्रा और शोक की अभिव्यक्ति को लेकर टकरावों से गुजरता है—जहाँ भजन और विलाप साथ चलते हैं।
फिरबे एक संवेदनशील ग्रामीण कथा है, जो परंपरा, सामाजिक दबाव और शोक को दर्शाती है। एक बुज़ुर्ग महिला की मृत्यु के बाद ‘फिरबे’ रस्म के लिए निकला परिवार, यात्रा और शोक की अभिव्यक्ति को लेकर टकरावों से गुजरता है—जहाँ भजन और विलाप साथ चलते हैं।











